Blog Widget by LinkWithin

Tuesday 30 June 2009

अन्तर्जाल और ब्लागिंग : वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मूल अधिकार (6)

अंतर्जाल ने  सूचनाओं के आदान प्रदान की गति को तेज किया, तो इस सुविधा से युक्त लोगों को एक वैश्विक मंच भी प्रदान किया है। आज ई-मेल के माध्यम से तुरंत सूचनाएँ दुनिया के किसी भी कोने से दूसरे कोने तक पहुँचती हैं।  आप पानी का एक गिलास पिएँ इस के पहले उस का उत्तर मिल जाता है।  इस माध्यम पर धीरे धीरे महत्वपूर्ण सूचनाएँ एकत्र होने लगीं।  उन्हें तलाशने के लिए खोज यंत्र बने।  आज किसी भी सूचना को प्राप्त करने के लिए सब से पहले अन्तर्जाल को खोजा जाने लगा है। सामाजिक समूह बने और फिर ब्लागिंग होने लगी। ब्लागिंग के माध्यम से हर मिनट नई सूचनाएँ जाल पर आने लगीं। गूगल, वर्डप्रेस और अन्य अनेक संस्थाओं ने अंतर्जाल पर लोगों को ब्लागिंग के लिए स्थान और साधन निशुल्क उपलब्ध कराना आरंभ कर दिया।  इस से जिन लोगों को इस साधन की उपलब्धता है, वे अपने अपने ब्लाग के माध्यम से नई सूचनाएँ और विचार अंतर्जाल पर डालने लगे।  इन मंचों ने अंतर्जाल की सुविधाओं को आम लोगों में लोकप्रियता प्रदान की है।

आज दुनिया की सभी समृद्ध भाषाओं में ब्लागिंग हो रही है, जहाँ वाक् और अभिव्यक्ति की हर  कला और विधा को स्थान मिला है।  संगीत, चित्र, चलचित्र, पेंटिंग्स, गद्य और पद्य लेखन, समाचार, आलेख सब कुछ ब्लागिंग में मौजूद है।  वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार को जो ऊंचाई ब्लागिंग ने प्रदान की है वह आज तक के इतिहास में उपलब्ध नहीं हो सकी थी।  कोई भी व्यक्ति अब अपने विचारों को किसी भी रूप में ब्लागिंग के माध्यम से अभिव्यक्त कर सकता है।  इस के लिए मनुष्य जाति को इस नई तकनीक का आभारी होना चाहिए। 
पु्स्तकों को ज्ञान का वाहक माना जाता है।  लेकिन इस का अर्थ यह नहीं कि वे केवल ज्ञान का प्रकाश ही फैलाती हैं। बहुत बड़ी मात्रा में पुस्तकें अज्ञान की वाहक भी हैं।  उसी तरह अभिव्यक्ति का हर माध्यम ज्ञान के साथ साथ अज्ञान भी फैलाता है।   अज्ञान फैलाने वाली पुस्तकें रोज बड़ी मात्रा में प्रकाशित हो कर फुटपाथ पर बिकती हैं, लेकिन उन में शायद ही कोई स्थाई स्थान प्राप्त कर पाती हों। वे जुगनू की तरह चमकती हैं और फिर अपना प्रकाश खो देती हैं।  लेकिन ज्ञानवाहक पुस्तकें एक बार चमकना आरंभ करती हैं तो फिर उन की वह चमक तब तक बरकरार रहती है जब तक कि उस से अधिक प्रकाशवान कोई अन्य न आ जाए।  उस के उपरांत भी वे इतिहास में अदा की गई अपनी भू्मिका के रूप में मौजूद रहती हैं।  अनेक बार आवश्यकता होने पर उन्हें तलाश करने में मनुष्य को अथक श्रम करना पड़ा है।  इसी तरह ज्ञान की वाहक सूचनाओं और अभिव्यक्तियों की स्थिति ब्लाग जगत में भी रहेगी।
अंततः मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।  आरंभ में वह अत्यन्त छोटे-छोटे समूहों में रहता था।  जैसे जैसे तकनीक का विकास हुआ उस का यह समूह बढ़ता गया। आज के राष्ट्र वैसे ही सब से बड़े समूह हैं।  तकनीक इन समूहों को भी तोड़ रही है और एक विश्व समुदाय का निर्माण कर रही है।  मनुष्य का विश्व समुदाय भविष्य की वास्तविकता है।  उस की ओर से किसी भी स्थिति में आँखें बन्द नहीं की जा सकती हैं।  मनुष्य का इतिहास ही छोटे समूहों से वसुधैव कुटुम्बकम की ओर की यात्रा है।  अंतर्जाल और ब्लागिंग ने इस यात्रा के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए संवाद का मंच जुटा दिया है।  
जब मनुष्य एक विश्व समुदाय के निर्माण की ओर बढ़ रहा है तो उसे और अधिक सामाजिक होना पड़ेगा।  उसे उन मूल्यों की परवाह करनी पड़ेगी जो इस विश्व समुदाय के बनने और उस के स्थाई रूप से बने रहने के लिए आवश्यक हैं।  वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इन मूल्यों के परे नहीं हो सकती। हमें इन मूल्यों की परवाह करनी होगी।  संविधान ने इन मूल्यों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 19 (2) में वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर निर्बंधन लगाने की व्यवस्था की है।  ब्लागिंग सहित संपूर्ण अंतर्जाल पर वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी इन निर्बंधनों के अधीन हैं। 
संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के ये निर्बंधन क्या हैं? इस पर हम अगले आलेख में बात करेंगे। (क्रमशः जारी)




13 टिप्पणियाँ:

vijay gaur/विजय गौड़ 30 June, 2009 6:43 AM  

अच्छा आलेख है।
आगे इंतजार है।

सतीश सक्सेना 30 June, 2009 7:45 AM  

बहुत बढ़िया लेख लिखा भाई जी ! शुभकामनायें

डॉ. मनोज मिश्र 30 June, 2009 7:48 AM  

बढ़िया लिखा है ,प्रतीक्षा रहेगी .

अजय कुमार झा 30 June, 2009 8:03 AM  

दिनेश जी...ब्लॉग्गिंग पर अभी तक इस दृष्टिकोण से कोई आलेख नहीं पढा था.इसलिए..बढिया लग रहा है..चित्रों का संयोजन भी खूब है..अगले अंक की प्रतीक्षा है.

संगीता पुरी 30 June, 2009 8:13 AM  

अच्‍छी जानकारी दी आपने .. अगली कडी का इंतजार रहेगा।

ताऊ रामपुरिया 30 June, 2009 9:45 AM  

बहुत उपयोगी. अब आगे का इंतजार करते हैं.

रामराम.

काजल कुमार Kajal Kumar 30 June, 2009 10:59 AM  

अब तो कभी कभी हैरानी होती है कि इन्टरनेट के बिना, कल तक हम काम कैसे करते थे.

डॉ .अनुराग 30 June, 2009 11:31 AM  

सूचनायो के इस विस्फोटक युग में मगर एक चीज ओर कोमन है ..त्वरित सूचना देने की हड़बड़ी ... जिसमे तथ्यों की पुष्टि का वक़्त नहीं है ...ओर यहाँ खेद है की तख्ती भी नहीं टांगी जाती

राज भाटिय़ा 30 June, 2009 5:49 PM  

सुंदर जानकारी के लिये धन्यवाद
आप के अगले लेख का इंतजार रहेगां.

अभिषेक ओझा 30 June, 2009 6:03 PM  

हम्म... अपने काम की बातें चल रही हैं.

alka sarwat 30 June, 2009 6:43 PM  

माननीय दिनेश जी ,ब्लागिंग वास्तव में बहुत अचूक हथियार बनने जा रहा है,इश्वर इसे अपराधियों की काली दृष्टि से बचाए

नरेश सिह राठौङ 30 June, 2009 9:54 PM  

बहुत अच्छी श्रृंखला चल रही है । अगली कडी का इंतजार है ।

तलाशिए जाल पर , जो चाहें ...

Custom Search

Labels

''अंधेर नगरी-चौपट राजा'' 498-ए acceptance Adoption Advocate Agreement bounce Burden of proof candidate cheque child labour cognigence commission complaint consent Constitution Constitution. India consumer contempt Contract court Court language Crime Criminal culpable homicede dispute Domestic election employee Expression FIR fraud Freedom Govt. Guaranty High Court Hindi Hindu homosexuality India insurance IPC Judge judicial reform Justice labour Law Lawyer Legal Advice legal problem legal System life Limitation live-in-relationship loan maintenance marriage marrige Medical misrepresentation mistake Murder Negligence Police power of attorney Press Proposal Qasab Rape receipt Rent Residence Restriction Retrenchment revocartion Solution sound mind Speech Strike succession Supreme Court Surity Terrorism Tobacco Tort compensation U.S. Undue influence Violence void War wife women workmen अदालत अधिनियम अनुचित अनुबंध अन्याय अपराध अपराधिक-मुकदमा अभिव्यक्ति अमरीका अराजकता आंदोलन आईपीसी आतंकवाद आदिवासी उच्च न्यायालय उत्तराधिकार उत्प्रेरक उपभोक्ता उम्मीदवार ऋण कंट्रेक्ट कब्जा कानून कानूनी जानकारी कानूनी समस्या कानूनी सलाह कैद कॉपीराइट खर्च गफलत गारन्टी गिरफ्तारी गुर्जर गोद घरेलू हिंसा चिकित्सकीय चिकित्सा चिट्ठाकारी चुनाव चैक बाउंस चोरी जज जनतन्त्र जमानत जीवन जुगाड़ जुर्माना. सजा तलाक त्रयी दत्तक दावा दीवानी दुर्घटना दुष्कृत्य देयता द्विविवाह धुम्रपान नरेगा नरेन्द्र मोदी नशा निगम नियोजन निरसन निर्णय निर्वाचन निषेध न्याय न्याय प्रणाली न्याय-प्रणाली न्यायाधीश न्यायिक सुधार पत्नी परिवार परिवार न्यायालय पुत्र पुत्री daughter पुलिस प्रत्याशी प्रस्ताव प्राथमिकी प्रेस फैमिली कोर्ट बंध-पत्र बजट बलात्कार बलात्संग बहनें बाबा चमत्कारी बाल श्रम बाल-विवाह बीमा ब्लाग भरण-पोषण भा.दं. संहिता भारत भारतीय कॉपीराइट कानून भ्रष्टाचार मकान मालिक मजदूरी मानव वध मुआवजा मुकदमा मुवक्किल मूल अधिकार राजस्थान रेगिंग रोकथाम लापरवाही लिखित वकील वसीयत वाक् वाहन वाहन चालन विधानसभा विधि विधिक राय विभाजन विलेख विवरण विवाद विवाह विश्वसनीयता व्यवस्था शिकायत शून्य श्रम न्यायालय संपत्ति संबंध संयुक्त संविधान सजा समझाइश समझौता समलैंगिकता सरकार सरकारी कर्मचारी सर्वोच्च न्यायालय सहमति साबित करने का भार साहवासी रिश्ता सुप्रीम कोर्ट स्त्री सम्मान स्वतंत्रता स्वीकृति हड़ताल हत्या हल हाई कोर्ट हिन्दी हिन्दू ह्त्या

  © Blogger template Newspaper III by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP