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Thursday, 28 August, 2008

बिना प्रतिफल के शून्य अनुबंध, और उस के अपवाद

प्रतिफल के बिना अनुबंध शून्य है, जब तक कि वह रजिस्टर्ड और लिखित न हो, या वह किए जा चुके किसी कार्य के प्रतिकर का वादा, अथवा अवधि कानून के कारण अवधि-पार ऋण चुकाने का वादा नहीं हो...

प्रतिफल के बिना किया गया कोई भी अनुबंध शून्य होगा, सिवाय जब तक कि .....

(1) वह लिखित रूप में अभिव्यक्त किया गया हो, और दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण के उस समय लागू किसी कानून के अंतर्गत रजिस्ट्रीकृत हो, और एक-दूसरे के साथ निकट संबंध रखने वाले पक्षकारों के बीच नैसर्गिक प्रेम व स्नेह के कारण किया गया हो; अथवा
(2)  ऐसा वादा, जो वादा करने वाले के लिए स्वैच्छा से पहले से किए गए किसी कार्य के लिए किया गया हो, या किसी ऐसी बात के लिए हो जिसे करने के लिए वादा करने वाला कानूनी रुप से बाध्य था; अथवा
(3) या ऐसा वादा, जो किसी ऐसे ऋण को पूरा या किस्तों में चुकाने के लिए हो, जिस के भुगतान के लिए ऋणी को बाध्य किया जा सकता था, लेकिन अवधि कानून के कारण अवधि-पार हो चुका हो, और जो स्वयं ऋणी द्वारा, या उस के मुख्तार-आम, या इसी काम के लिए विशेष रुप से अधिकृत मुख्तार खास द्वारा हस्ताक्षरित किया गया हो।
इन में से किसी भी सूरत में ऐसा अनुबंध कंट्रेक्ट है।
स्पष्टीकरण-1 ... इस धारा की कोई भी बात दान-दाता द्वारा वास्तव में किए जा चुके दान और प्राप्तकर्ता को प्रभावित नहीं करेगी।


स्पष्टीकरण-2 ... कोई भी अनुबंध जिस के लिए वादा करने वाले ने स्वतंत्रता पूर्वक स्वीकृति दी है, केवल इसलिए शून्य नहीं होगा कि प्रतिफल पर्याप्त नहीं है; लेकिन प्रतिफल की पर्याप्तता को इस बात के लिए अदालत द्वारा देखा जाएगा कि वादा करने वाले द्वारा स्वीकृति स्वतंत्रतापूर्वक दी गई थी।
जैसे ...
(क) को किसी प्रतिफल के बिना 1,000 रुपए देने का वादा करता है, यह अनुबंध शून्य है।
(ख)स्वाभाविक प्रेम और स्नेह से अपने पुत्र को 1,000 रुपए देने का वचन देता है। के प्रति अपने वादे को लिखता है और लेख को रजिस्ट्रीकृत कराता है। यह अनुबंध कंट्रेक्ट है।
(ग) की थैली पड़ा पाता है और को लौटा देता है। को 50 रुपए देने का वादा करता है। यह कंट्रेक्ट है।
(घ) के शिशु पुत्र का पालन करता है। वैसा करने में हुए खर्चे को देने का वचन करता है। यह कंट्रेक्ट है।
(ङ) के 1,000 रुपए देय हैं, लेकिन वह ऋण मियाद के कानून के कारण दावा करने लायक नहीं रह गया है। उस ऋण के पेटे 500 रुपए देने का लिखित वादा हस्ताक्षऱ कर के देता है। यह कंट्रेक्ट है।
(च) 1,000 रुपए कीमत के घोड़े को 10 रुपए में बेचने का अनुबंध करता है। इस अनुबंध के लिए की स्वीकृति स्वतंत्रता पूर्वक दी गई थी। यह कंट्रेक्ट है।
(छ) 1,000 रुपए कीमत के घोड़े को 10 रुपए में बेचने का अनुबंध करता है। इस से इन्कार करता है कि इस सौदे के लिए उस की स्वीकृति स्वतंत्रता पूर्वक दी गई थी।
यहाँ प्रतिफल की अपर्याप्तता ऐसा तथ्य है जिसे अदालत को यह विचार करने में गणना में लेना चाहिए कि की स्वीकृति स्वतंत्रता पूर्वक दी गई थी या नहीं। 

3 टिप्पणियाँ:

अभिषेक ओझा 28 August, 2008 5:59 AM  

लिखित और रजिस्ट्रीकृत में कितना फर्क है... अगर केवल लिखित दस्तावेज है तो शायद वो वैध नहीं होता?

Udan Tashtari 28 August, 2008 7:05 AM  

आभार इस जानकारी के लिए.

Hari Joshi 28 August, 2008 8:51 AM  

आप हमेशा काम की जानकारी देते हैं। अगर कोई लगातार आपके चिट्ठे को पढ़े तो आधा वकील तो हो ही जाएगा।

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